छत्तीसगढ़
गांजा तस्करी पर पुलिस की कार्रवाई या ‘सेटिंग’ का खेल?
एमसीबी में लगातार पकड़ी जा रही गांजे की बड़ी खेप, फिर भी कथित मास्टरमाइंड और बड़े कारोबारियों तक क्यों नहीं पहुंच रहे पुलिस के हाथ? नागपुर चौकी की कार्रवाई को लेकर उठे गंभीर सवाल

एमसीबी। जिले में लगातार सामने आ रही गांजा तस्करी की बड़ी कार्रवाइयों ने जहां पुलिस की सक्रियता को उजागर किया है, वहीं दूसरी ओर इन कार्रवाइयों के पीछे पूरे नेटवर्क और कथित बड़े कारोबारियों तक पुलिस की पहुंच को लेकर गंभीर सवाल भी खड़े हो रहे हैं। सवाल यह है कि अगर जिले में लाखों-करोड़ों रुपये की गांजे की खेप लगातार पकड़ी जा रही है, तो आखिर इस कारोबार को संचालित करने वाले बड़े चेहरे पुलिस की गिरफ्त से बाहर क्यों हैं?

हाल के महीनों में नागपुर चौकी क्षेत्र में गांजे की बड़ी खेप पकड़े जाने के मामले सामने आए हैं। जून 2026 में दो कारों से 565 किलो गांजा जब्त किए जाने की रिपोर्ट सामने आई थी। वहीं सितंबर 2026 में दो पिकअप वाहनों से 9 क्विंटल 19 किलो गांजा जब्त किए जाने की जानकारी भी सामने आई।
इन बड़ी कार्रवाइयों के बावजूद अब सबसे बड़ा सवाल तस्करी के पूरे नेटवर्क को लेकर है। क्या पुलिस सिर्फ खेप और छोटे स्तर के आरोपियों तक ही सीमित रह जा रही है, या फिर जांच वास्तव में उन लोगों तक भी पहुंच रही है जो इस कथित कारोबार के पीछे हैं?

‘सेटिंग’ के आरोपों ने बढ़ाई सनसनी
स्थानीय स्तर पर कुछ लोगों द्वारा दावा किया जा रहा है कि नागपुर चौकी क्षेत्र से गांजे से भरी गाड़ियां नियमित रूप से गुजरती हैं और कथित रूप से कुछ वाहन बिना कार्रवाई के निकल जाते हैं। आरोप यह भी लगाए जा रहे हैं कि जिन कारोबारियों की पुलिस से कथित ‘सेटिंग’ नहीं बन पाती या जो कथित कमीशन देने से इनकार करते हैं, उन्हीं की गाड़ियां कार्रवाई की जद में आती हैं।
हालांकि इन गंभीर आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और न ही उपलब्ध सार्वजनिक पुलिस रिकॉर्ड इन दावों को साबित करते हैं। यही वजह है कि अब इन आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग उठना स्वाभाविक है।





