बैकुंठपुर | विशेष संवाददाता जनपद पंचायत बैकुंठपुर के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत कटकोना से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पंचायत चुनाव व्यवस्था और आरक्षित सीटों पर होने वाले निर्वाचन को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ग्राम पंचायत कटकोना की सरपंच शिप्रा नायक के जाति प्रमाण पत्र को लेकर आपत्ति सामने आने के बाद उनका सरपंच पद चले जाने की जानकारी सामने आई है। मामला केवल सरपंच पद से हटने तक सीमित नहीं है, बल्कि अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस जाति प्रमाण पत्र के आधार पर उन्होंने आरक्षित सीट से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की, यदि जांच में वह प्रमाण पत्र गलत या अमान्य पाया गया, तो इसके लिए जिम्मेदारी किसकी तय होगी?

आरक्षित सीट का लाभ किस आधार पर मिला?
पंचायत चुनाव में आरक्षित सीट का लाभ संबंधित आरक्षित वर्ग की पात्रता के आधार पर ही मिलता है। ऐसे में यदि किसी उम्मीदवार ने ऐसी जाति का प्रमाण प्रस्तुत करके चुनाव लड़ा, जिससे वह वास्तव में संबंधित नहीं थी, तो यह सामान्य चुनावी विवाद से कहीं अधिक गंभीर विषय बन सकता है।
छत्तीसगढ़ शासन के जाति प्रमाण पत्र संबंधी आधिकारिक पोर्टल पर भी जाति प्रमाण के लिए विभिन्न दस्तावेजों और अभिलेखों की व्यवस्था निर्धारित है।
यही वजह है कि कटकोना मामले में अब ग्रामीणों के बीच यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि क्या केवल पद से हट जाना ही पर्याप्त कार्रवाई है, या कथित गलत जातिगत जानकारी देकर आरक्षित सीट से चुनाव लड़ने के पूरे मामले की भी जांच होनी चाहिए?
ग्रामीणों के भरोसे का सवाल
अगर जांच में यह साबित होता है कि चुनाव के दौरान जानबूझकर गलत जातिगत जानकारी दी गई थी, तो मामला केवल एक पद गंवाने तक सीमित नहीं रहेगा। ऐसी स्थिति में यह भी जांच का विषय होगा कि प्रमाण पत्र किस आधार पर बना, उसमें कौन-कौन से दस्तावेज लगाए गए, चुनाव के दौरान उसकी जांच कैसे हुई और आरक्षित सीट का लाभ किस आधार पर मिला।
सबसे बड़ा सवाल यह भी है कि क्या चुनावी प्रक्रिया में संबंधित अधिकारियों को गलत जानकारी देकर गुमराह किया गया?
यदि ऐसा पाया जाता है तो पूरे मामले में जिम्मेदारी तय करने और आवश्यक कानूनी कार्रवाई की मांग उठना स्वाभाविक है।
पद गया, लेकिन कार्रवाई कब?
अब कटकोना के ग्रामीणों और आम लोगों की निगाह प्रशासन की अगली कार्रवाई पर है।
सवाल सीधे हैं—
क्या शिप्रा नायक के जाति प्रमाण पत्र की पूरी जांच होगी?
क्या चुनाव के दौरान प्रस्तुत दस्तावेजों की जांच की जाएगी?
अगर जानबूझकर गलत जानकारी देने की पुष्टि होती है तो क्या आपराधिक प्रकरण दर्ज होगा?
और यदि कोई अपराध बनता है तो कार्रवाई कब होगी?
छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम में पंचायत पदाधिकारी को कदाचार आदि के आधार पर पद से हटाने तथा कुछ मामलों में छह वर्ष के लिए निर्वाचन से निरर्हित किए जाने का प्रावधान है।
हालांकि, किसी व्यक्ति पर धोखाधड़ी, जालसाजी या अन्य आपराधिक धाराएं तभी निश्चित रूप से लगाई जा सकती हैं जब जांच में संबंधित तथ्यों और जानबूझकर किए गए कृत्य का प्रमाण सामने आए।
अब जांच से सामने आएगा सच
कटकोना का यह मामला अब केवल एक सरपंच के पद पर बने रहने या हटने का मामला नहीं रह गया है। यह सवाल आरक्षित सीटों की चुनावी पारदर्शिता, जाति प्रमाण पत्रों की सत्यता और प्रशासनिक जांच की विश्वसनीयता से भी जुड़ गया है।
यदि प्रमाण पत्र में गलती मात्र थी तो उसकी प्रकृति और जिम्मेदारी अलग होगी, लेकिन यदि जांच में यह सामने आता है कि जानबूझकर गलत जातिगत पहचान या जानकारी के आधार पर आरक्षित सीट का लाभ लिया गया, तो फिर पूरे मामले में कानूनी जिम्मेदारी तय होना जरूरी है।
अब देखना यह है कि प्रशासन इस मामले को केवल पद समाप्त होने तक सीमित रखता है या फिर जाति प्रमाण पत्र से लेकर चुनाव लड़ने तक पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक जिम्मेदारों पर कार्रवाई करता है।
कटकोना के ग्रामीणों का सवाल साफ है—
सरपंची गई, अब कानून की कार्रवाई कब होगी?
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